कतर-सऊदी अरब तनाव – जनवरी में कतर का ओपेक से बाहर निकलना , सऊदी अरब से तनाव जारी ।
कतर-सऊदी अरब तनाव, विश्व में सबसे ज्यादा एलएनजी का निर्यात करने वाला देश कतर का अगले वर्ष तेल निर्यात देशों के समूह ओपेक से बाहर निकलना तय हो गया है । कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने इस बात की पुष्टि किए हैं और उन्होंने यह भी कहा है कि उनका देश अब गैस उत्पादन विशेष तौर से ध्यान देने की तैयारी कर रहा है इसलिए तेल मेरे हाथों का संगठन छोड़ने का फैसला कर लिया है अल-काबी ने कहां है कि जनवरी 2019 में कतर के द्वारा ओपेक के सदस्यता वापस लेने की तैयारी कर ली गई है और ओपेक को इसके बारे में सूचना पहुंचा दी गई है ।
कतर-सऊदी अरब तनाव
हम आपको बता दें कि कतर-सऊदी अरब तनाव में कतर ने यह बड़ा फैसला आगामी 6 दिसंबर को होने वाली ओपेक देशों की मीटिंग से ठीक पहले ही ले चुका है । वह कतर के बनने के एक वर्ष उपरांत ही सन् 1961 से इसका सदस्यता पद ग्रहण किया था । कतर देश ओपेक का सदस्य राष्ट्र बनाने वाला पहला देश है । जिसने इस संगठन से सदस्यता पद त्यागने का फैसला ले लिया है । लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि सऊदी अरब , यूएई , बहरीन और मिस्र जैसे आसपास के देश भी कतर का कूटनीति संबंध पहले जैसे अच्छे से अब निभा नहीं पा रहे हैं । क्योंकि इन देशों ने आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कतर पर कुछ वर्ष पहले ही जून से ही व्यापारिक एवं आवाजाही जैसी प्रक्रिया पर रोक लगाने की तैयारी कर ली थी । कतर-सऊदी अरब तनाव के बाद कतर देश का कहना है कि यह मेरा फैसला किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में नहीं किया गया है ।
कतर-सऊदी अरब तनाव – अल-काबी ने कहां है कि कतर देश आगे भी कच्चा तेल का निर्यात करता रहेगा । लेकिन वह गैस उत्पादन पर अधिक जोर देगा । क्योंकि वह दुनिया में एलएनजी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है । अल-काबी ने कहा कि कच्चे तेल में हमारे लिए अधिक फायदा अब नहीं रह गए हैं । हम एलएनजी को छोड़कर गैस उत्पादन में अपनी फायदे को बढ़ा सकते हैं । अल-काबी ने कहां कि ओपेक को इस घोषणा से पहले ही उन्हें सूचना पहुंचा दी गई है और कतर देश के फैसले के बारे में अवगत करा दिया गया है ।
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